हम वही होते हैं जो हमेंयाद होता है : स्मृतियों की गुत्थी को खोलना

दोनगाँवकर, भक्ति (2016) हम वही होते हैं जो हमेंयाद होता है : स्मृतियों की गुत्थी को खोलना. i wonder... (2). pp. 146-152. ISSN 2582-1636

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Abstract

मानव मस्तिष्क अपने भीतर चीजों को दर्ज करना कभी बन्द नहीं करता । यह बड़ी आसानी से बहुत बड़ी मात्रा में जानकारियों का सग्रह क ं रके रखता है। यह ऐसा कै से कर पाता है? और स्मृति याँ इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों हैं? इस लेख में स्मृति से जुड़ी गहरी जानकारियाँ दी गई हैं और बताया गया है कि स्मृतियों की हमारे जीवन में क्या भूमिका होती है।

Item Type: Articles in APF Magazines
Authors: दोनगाँवकर, भक्ति
Document Language:
Language
Hindi
Uncontrolled Keywords: Science, Science education, Classroom science, Cognition and Neural systems, Molecular biology, Neuroscience
Subjects: Social sciences > Education > Science education
Divisions: Azim Premji University > University Publications > i Wonder...
Full Text Status: Public
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URI: http://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/2974
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